शास्त्रविरूद्ध साधना ही नास्तिकता का कारण
शास्त्र विरूद्ध साधना ही नास्तिकता का कारण है:-
एक क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में मानव ने बहुत अधिक विकास किया है चाहे वह तकनीकी क्षेत्र हो या खगोल व भूगोल का क्षेत्र हो। मानव ने आमूल-चूल परिवर्तन किया है।हमारे रहन-सहन में भी बहुत परिवर्तन आया है। हमारे घरों में भी ऐसी झलक देखने को मिलती है जैसे आटा पीसने की चक्की,पानी पीने का केम्पर,मिक्सी,टीवी,मोबाइलआदि-आदि पहनावे में परिवर्तन हुआ है। इंसान इतना समझदार होता जा रहा है।किसी भी वस्तु की खरीदादारी करता है तो उसे प्रमाण चाहिए शुद्धता का लेकिन धार्मिक क्षेत्र में व्यक्ति वही पुराने तोर-तरीके जो ब्राह्मणों ने शुरू किये थे जो अपनी जेब भरने के लिए लोगों को ठगते है भक्ति के सभी तरीके शास्त्रविरूद्ध होने से व्यक्ति को कोई लाभ नहीं होता परिणामस्वरूप वह व्यक्ति हताश होकर नास्तिकता की बढ़ने लगता है इस ब्राह्मणवाद व पाखण्ड ने इंसान को नास्तिक बना दिया।मूर्तिपूजा व व्रत करना हमारी गीता जी में कहीं भी प्रमाण नहीं है।
शास्त्र अनुसार भक्ति करना ही मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य अगर हमने मनुष्य जन्म में सत भक्ति नहीं की तो हमारा मनुष्य जन्म असफल हो जाएगा इसका मिलना और नहीं मिलने का कोई औचित्य नहीं होगा
वर्तमान समय में दुनिया में बहुत से संत हो चुके हैं और अभी भी है भी लेकिन सच्चा संत पूरे विश्व में एक होता है जो कि सभी शास्त्रों के अनुसार भक्ति बताता वर्तमान समय में सच्चा सतगुरु पूरे विश्व में एकमात्र है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी सच्चे सतगुरु है जो कि शास्त्रों के अनुसार भक्ति बताते हैं शास्त्र अनुसार भक्ति करने से भक्तों को सभी प्रकार के लाभ शारीरिक मानसिक आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं और इसके साथ ही पूर्ण मोक्ष भी प्राप्त होता है
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